उत्तर प्रदेशझाँसी

नागिन की मौत का ‘बदला’ लेने आया नाग? उसी कमरे में सो रहे भाई-बहन को डसा, 7 साल के मासूम की मौत

झांसी में जिस कमरे में दो दिन पहले सांप को मारने का दावा, उसी जगह फिर निकला जहरीला सांप; सोते हुए दो मासूमों को डसा, बेटे की मौत और 4 वर्षीय बेटी की हालत गंभीर—क्या यह महज संयोग था?

दो दिन पहले कमरे में निकले एक सांप को लोगों ने मार दिया था। परिवार ने सोचा खतरा टल गया… लेकिन अगली ही रात उसी कमरे में एक और जहरीला सांप पहुंच गया। मां के पास सो रहे भाई-बहन को उसने डस लिया। पहले चार साल की बेटी दर्द से चीखी और कुछ ही देर बाद सात साल का बेटा भी तड़पने लगा। इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया।
उत्तर प्रदेश के झांसी में सर्पदंश की एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया। बड़ागांव थाना क्षेत्र के हरदौलपुर मोहल्ले में घर के अंदर सो रहे दो मासूम भाई-बहन को कथित रूप से जहरीले सांप ने डस लिया।
परिजन दोनों बच्चों को आनन-फानन में मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, लेकिन सात वर्षीय मयंक को बचाया नहीं जा सका। उसकी चार वर्षीय बहन प्रगति को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया।
घटना के बाद इलाके में एक और बात को लेकर चर्चा तेज हो गई। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इसी कमरे में दो-तीन दिन पहले भी एक सांप निकला था, जिसे मार दिया गया था। अब उसी स्थान पर दूसरा सांप निकलने और बच्चों को डसने के बाद कुछ लोग इसे सांप के जोड़े और ‘बदले’ से जोड़ रहे हैं। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
पिता काम पर निकले, मां के पास सो रहे थे दोनों बच्चे
मयंक और प्रगति के पिता प्रदीप कुशवाहा फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं। घटना वाली रात परिवार रोज की तरह खाना खाकर सो गया था।
बताया जा रहा है कि तड़के करीब साढ़े तीन बजे प्रदीप काम के लिए घर से निकल गए। कमरे में उनकी पत्नी नेहा अपने दोनों बच्चों के साथ सो रही थीं।
परिवार को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ देर बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदलने वाली है।
पहले बेटी की चीख सुनाई दी, फिर बेटा भी रोने लगा
कुछ देर बाद अचानक चार वर्षीय प्रगति दर्द से चीख उठी। बेटी की आवाज सुनकर मां नेहा की नींद खुली। वह बेटी को संभाल ही रही थीं कि बगल में सो रहा सात वर्षीय मयंक भी दर्द से रोने लगा।
कमरे में देखा गया तो वहां एक सांप मौजूद था।
परिजनों को आशंका हुई कि सांप दोनों बच्चों को डस चुका है। शोर सुनकर आसपास के लोग भी पहुंच गए और दोनों मासूमों को तत्काल इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज ले जाया गया।
अस्पताल पहुंचा परिवार, लेकिन मयंक को नहीं बचाया जा सका
परिवार दोनों बच्चों की जिंदगी बचने की उम्मीद में अस्पताल पहुंचा, लेकिन सात वर्षीय मयंक को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
चार वर्षीय प्रगति को गंभीर अवस्था में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। बेटे की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया।
जिस घर में कुछ घंटे पहले तक दोनों बच्चों की आवाजें गूंज रही थीं, वहां अब मातम पसरा है।
परिजनों के मुताबिक प्रदीप और नेहा के यही दो बच्चे थे। बेटा दुनिया छोड़ चुका है, जबकि बेटी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही है।
मां की एक ही प्रार्थना—“मेरा बेटा चला गया, बेटी को बचा लो”
मयंक की मौत से मां नेहा का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार का कहना है कि रात में किसी को पता नहीं चला कि सांप कमरे में कब और कैसे पहुंचा।
परिजनों का दर्द इस बात को लेकर और बढ़ गया कि यदि सांप समय रहते दिखाई दे जाता तो शायद बच्चों को पहले अस्पताल पहुंचाया जा सकता था।
बेटे को खो चुकी मां की सारी उम्मीद अब अस्पताल में भर्ती अपनी चार वर्षीय बेटी पर टिकी है।
डसने के बाद सुराख में घुस गया सांप?
मृतक बच्चे के ताऊ हरचरण कुशवाहा के मुताबिक घटना के बाद सांप कमरे में दिखाई दिया था, लेकिन बाद में मकान के अंदर बने एक सुराख में घुस गया।
बताया गया कि उसकी तलाश भी की गई, लेकिन वह नहीं मिला। इसके बाद परिवार ही नहीं बल्कि आसपास रहने वाले लोगों में भी दहशत फैल गई।
दो दिन पहले भी इसी कमरे में निकला था सांप
यहीं से इस घटना में एक हैरान करने वाला संयोग सामने आता है।
स्थानीय पार्षद सुशील कुमार कुशवाहा के मुताबिक दो-तीन दिन पहले भी इसी कमरे में एक सांप निकला था, जिसे ग्रामीणों ने मार दिया था।
कुछ ही दिनों बाद दूसरे सांप के उसी कमरे में दिखाई देने और दो बच्चों को डसने के कारण स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
कुछ लोग इसे पहले मारे गए सांप के जोड़े से जोड़ रहे हैं और ‘बदला’ लेने जैसी बातें कर रहे हैं। हालांकि इसकी किसी सरकारी एजेंसी या वन विभाग द्वारा पुष्टि नहीं की गई है।
क्या सच में सांप लेते हैं बदला?
लोककथाओं और फिल्मों में नाग-नागिन के बदले की कहानियां लंबे समय से दिखाई जाती रही हैं, लेकिन वैज्ञानिक रूप से सांप द्वारा इंसानों की तरह किसी घटना को याद रखकर योजनाबद्ध तरीके से बदला लेने का प्रमाण नहीं है।
इसलिए पहले सांप के मारे जाने और बाद में दूसरे सांप के उसी कमरे में पहुंचने को ‘बदला’ कहना वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जा सकता। दोनों घटनाओं के बीच संबंध होने की पुष्टि भी नहीं हुई है।
हालांकि एक ही स्थान पर बार-बार सांप दिखाई देना आसपास उनके छिपने के अनुकूल जगह, भोजन की उपलब्धता या प्रवेश के रास्ते होने की ओर संकेत कर सकता है।
करैत होने की आशंका, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं
स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि बच्चों को डसने वाला सांप करैत हो सकता है। इसकी आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
करैत भारत में पाए जाने वाले अत्यंत विषैले सांपों में शामिल है। इसका विष तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है और सर्पदंश की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता बेहद महत्वपूर्ण होती है।
सांप के काटने पर झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय मरीज को जल्द से जल्द ऐसे अस्पताल पहुंचाना चाहिए जहां सर्पदंश का उचित इलाज उपलब्ध हो।
एक संयोग जिसने पूरे मोहल्ले को हिला दिया
दो दिन पहले कमरे में सांप निकलना, उसे मार दिया जाना और फिर उसी कमरे में दूसरे सांप का पहुंचकर दो मासूमों को डस देना—इन घटनाओं ने स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया है।
लेकिन ‘नागिन की मौत का बदला लेने आया नाग’ जैसी चर्चाओं के बीच वैज्ञानिक तथ्य यही है कि सांपों में इंसानों की तरह योजनाबद्ध प्रतिशोध लेने का प्रमाण नहीं है।
इस दर्दनाक घटना में एक परिवार ने अपना सात साल का बेटा खो दिया है और अब उसकी सारी उम्मीद चार वर्षीय बेटी के स्वस्थ होकर घर लौटने पर टिकी है।

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