23 करोड़ की ड्रेजिंग के बाद भी शारदा का कहर, रेल ट्रैक के नीचे 40 फीट तक पानी का रिसाव
योगी सरकार ने शारदा नदी के कहर से इलाके को बचाने के लिए करीब 23 करोड़ रुपये खर्च कर ड्रेजिंग कराई थी, लेकिन दो साल बाद ही बाढ़ के पानी ने हजारों एकड़ फसल को डुबोने के साथ मैलानी-नानपारा रेल रूट पर संकट खड़ा कर दिया। छह ट्रेनें सात दिनों के लिए निरस्त, अब सरकारी योजना की उपयोगिता और निगरानी पर उठ रहे सवाल।

23 करोड़ रुपये खर्च हुए… दावा था शारदा के कहर को रोकने का। लेकिन दो साल बाद शारदा फिर बेकाबू है। पानी खेतों को निगल रहा है, रेलवे ट्रैक के नीचे करीब 40 फीट तक रिसाव पहुंच चुका है और 6 ट्रेनें रोक दी गई हैं। सवाल सीधा है—आखिर 23 करोड़ का काम शारदा के सामने क्यों बेअसर नजर आ रहा है? Ground Zero पर हमारी पड़ताल में सामने आई पूरी तस्वीर देखिए…”
लखीमपुर खीरी। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश का असर अब मैदानी इलाकों में भी साफ दिखाई देने लगा है। लखीमपुर खीरी में शारदा नदी एक बार फिर उफान पर है। नदी का ओवरफ्लो पानी आसपास के बड़े इलाके में फैल गया है। हजारों एकड़ गन्ने और धान की फसल जलमग्न हो चुकी है और अब शारदा का पानी रेलवे ट्रैक की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि करीब दो वर्ष पहले योगी सरकार ने शारदा नदी के कहर से इलाके को बचाने और नदी की धारा को नियंत्रित करने के उद्देश्य से करीब 23 करोड़ रुपये खर्च कर ड्रेजिंग का काम कराया था। उस समय उम्मीद जताई गई थी कि नदी की स्थिति को बेहतर करने और बाढ़ के खतरे को कम करने में इस काम से मदद मिलेगी। लेकिन मौजूदा हालात में यह योजना सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है।
शारदा नदी के बढ़े जलस्तर का पानी मैलानी-नानपारा रेल रूट पर भीरा और पलिया के बीच रेलवे ट्रैक तक पहुंच गया है। रेलवे के मुताबिक किलोमीटर संख्या 238/09 से 239/01 के बीच पुराने क्षतिग्रस्त स्थल पर जल रिसाव की स्थिति सामने आई है। ट्रैक के नीचे से पानी का रिसाव शुरू होने के बाद रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए इस रूट पर ट्रेनों का संचालन रोक दिया है।
रेलवे इंजीनियरों की टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रही है। गेज के जरिए ट्रैक के नीचे की स्थिति की जांच की जा रही है, जबकि मशीनों की मदद से ट्रैक का एलाइनमेंट भी चेक किया जा रहा है। मौके पर करीब 40 फीट नीचे तक पानी के असर की जांच की जा रही है। रेलवे ट्रैक के दोनों तरफ भी बड़े क्षेत्र में पानी पहुंच गया है और कई स्थानों पर पानी की धार साफ दिखाई दे रही है।
स्थिति को देखते हुए मैलानी-नानपारा-बिछिया रूट की छह ट्रेनें सात दिनों के लिए निरस्त कर दी गई हैं। इनमें ट्रेन नंबर 52264 और 52262 मैलानी-नानपारा, 52260 मैलानी-बिछिया विस्टाडोम, 52259 बिछिया-मैलानी तथा 52261 और 52263 नानपारा-मैलानी शामिल हैं।
रेलवे ट्रैक पर संकट के साथ किसानों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। आसपास के इलाकों में हजारों एकड़ गन्ने और धान की फसल पानी में डूबी हुई है। किसानों को अब फसल बर्बाद होने की चिंता सता रही है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब शारदा नदी के कहर को कम करने के लिए करीब 23 करोड़ रुपये खर्च किए गए, तो मौजूदा बाढ़ की स्थिति में उस काम का असर जमीन पर कितना दिखाई दे रहा है? क्या ड्रेजिंग के बाद नदी की स्थिति की नियमित निगरानी हुई? क्या अधिकारियों ने संभावित बाढ़ और ओवरफ्लो की स्थिति के लिए पर्याप्त इंतजाम किए थे?
मौजूदा हालात में अधिकारियों की निगरानी और योजना के क्रियान्वयन पर सवाल जरूर उठ रहे हैं, हालांकि 23 करोड़ रुपये का काम पूरी तरह विफल रहा या मौजूदा नुकसान सीधे उसी काम की वजह से हुआ—इसकी पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।
फिलहाल शारदा का पानी किसानों और रेलवे दोनों के लिए चुनौती बना हुआ है। छह ट्रेनों के निरस्त होने से यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है, जबकि हजारों एकड़ फसल पर संकट मंडरा रहा है। अब निगाहें रेलवे और संबंधित विभागों की तकनीकी जांच पर हैं कि ट्रैक को दोबारा सुरक्षित बनाने में कितना समय लगेगा और 23 करोड़ रुपये की ड्रेजिंग योजना आखिर शारदा के कहर के सामने कितनी कारगर साबित हुई।



