नकली दवाइयों का मौत वाला कारोबार! 30% कमीशन के लालच में बिक रहा ज़हर, ऐसे बचाएं अपनी और परिवार की जान
फर्जी बिल, नकली दवाइयां और करोड़ों का खेल… जानिए कैसे पहचानें असली दवा, क्या बरतें सावधानी और एफएसडीए की कार्रवाई में क्या हुआ खुलासा।

क्या आपके घर में रखी दवा सचमुच बीमारी ठीक कर रही है या धीरे-धीरे आपकी जान ले रही है? अगर आप मेडिकल स्टोर से बिना जांचे दवा खरीद लेते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। देश में नकली दवाइयों का ऐसा खतरनाक नेटवर्क सामने आया है, जिसने मरीजों की जिंदगी को दांव पर लगा दिया है।
देश में नकली दवाइयों का कारोबार लगातार चिंता का विषय बनता जा रहा है। आगरा में सामने आए एक बड़े मामले ने यह साफ कर दिया है कि कुछ दवा माफिया फर्जी बिल, निरस्त लाइसेंस और नकली सैंपलों के सहारे करोड़ों रुपये की दवाइयां बाजार में बेच रहे थे। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क में दवाओं की बिक्री बढ़ाने के लिए मेडिकल स्टोर संचालकों को 30 प्रतिशत तक कमीशन दिया जाता था, जिससे यह कारोबार कई राज्यों तक फैल गया।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की जांच के बाद इस मामले में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जांच के दौरान कई स्थानों पर बड़ी मात्रा में संदिग्ध दवाइयां मिलीं, जिससे स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है।
मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़
नकली दवाइयां केवल आर्थिक धोखाधड़ी नहीं हैं, बल्कि सीधे मरीजों की जान से खिलवाड़ करती हैं। ऐसी दवाओं में या तो जरूरी तत्व नहीं होते या गलत मात्रा में मिलाए जाते हैं। इसके कारण—
बीमारी ठीक नहीं होती।
मरीज की हालत और गंभीर हो सकती है।
संक्रमण बढ़ सकता है।
शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है।
गंभीर मामलों में मरीज की मौत तक हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार एंटीबायोटिक, हार्ट, डायबिटीज, कैंसर और बच्चों की दवाओं में नकली दवाओं का खतरा सबसे ज्यादा गंभीर माना जाता है।
आखिर नकली दवा की पहचान कैसे करें?
दवा खरीदते समय कुछ सावधानियां आपकी जान बचा सकती हैं—
✅ हमेशा लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर से ही दवा खरीदें।
✅ दवा का बिल जरूर लें और सुरक्षित रखें।
✅ पैकेट पर बैच नंबर, निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट जांचें।
✅ पैकिंग टूटी, फटी या संदिग्ध लगे तो दवा न खरीदें।
✅ टैबलेट का रंग, आकार या गंध अलग लगे तो उसका उपयोग न करें।
✅ एमआरपी से बहुत कम कीमत पर मिलने वाली दवा से सावधान रहें।
✅ डॉक्टर द्वारा लिखे गए ब्रांड की जगह दूसरी दवा लेने से पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लें।
उपभोक्ता क्या करें?
यदि किसी दवा पर संदेह हो तो—
दवा का सेवन तुरंत रोक दें।
डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।
मेडिकल स्टोर का बिल सुरक्षित रखें।
दवा की शिकायत अपने जिले के औषधि निरीक्षक (Drug Inspector) या एफएसडीए कार्यालय में करें।
जरूरत पड़ने पर हेल्पलाइन या ऑनलाइन शिकायत पोर्टल का उपयोग करें।
सरकार और विभाग की जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि नकली दवाओं के कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए नियमित छापेमारी, कड़ी निगरानी, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और लोगों में जागरूकता बेहद जरूरी है। जब तक उपभोक्ता सतर्क नहीं होंगे, तब तक ऐसे गिरोह नए तरीके अपनाकर लोगों की जान से खिलवाड़ करते रहेंगे।
दवा बीमारी दूर करने के लिए होती है, लेकिन यदि वही दवा नकली निकल जाए तो वह इलाज नहीं, बल्कि जानलेवा साबित हो सकती है। इसलिए अगली बार जब भी दवा खरीदें, जल्दबाजी नहीं बल्कि पूरी सावधानी बरतें। आपकी छोटी सी सतर्कता आपके और आपके परिवार की जिंदगी बचा सकती है।

