लखीमपुर खीरी

आंधी के बाद आग का तांडव… रातभर जलता रहा गांव, 74 परिवारों की जिंदगी राख में बदली

मितौली के कारी बडेरी गांव में भीषण आग से 50 घर प्रभावित, पांच मवेशियों की मौत… डीएम-एसपी ने मौके पर पहुंच संभाला मोर्चा

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तेज हवाएं चल रही थीं… लोग गर्मी से राहत की उम्मीद कर रहे थे। तभी अचानक उठीं आग की लपटें और देखते ही देखते पूरा गांव चीख-पुकार से गूंज उठा। रातभर धधकती आग ने कई परिवारों की जिंदगी उजाड़ दी…

लखीमपुर खीरी के मितौली क्षेत्र में सोमवार रात आई तेज आंधी अपने साथ ऐसा कहर लेकर आई, जिसने कुछ ही घंटों में दर्जनों परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। तहसील मितौली के ग्राम कारी बडेरी मजरा मुल्तानपुर ग्रंट में लगी भीषण आग ने पूरे गांव को दहला दिया। आग इतनी तेजी से फैली कि लोग संभल भी नहीं पाए और देखते ही देखते करीब 50 मकान इसकी चपेट में आ गए। इस दर्दनाक हादसे में 74 परिवारों का सामान जलकर राख हो गया, जबकि पांच मवेशियों की मौत हो गई। राहत की बात सिर्फ इतनी रही कि कोई जनहानि नहीं हुई।
गांव में रात का सन्नाटा था। तेज हवाएं चल रही थीं और लोग अपने घरों में मौजूद थे। तभी अचानक आग की लपटें उठीं और देखते ही देखते तेज आंधी ने आग को विकराल रूप दे दिया। आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को घरों से बाहर निकलने तक का समय नहीं मिला। कोई अपने बच्चों को बचाने में जुटा था तो कोई घर से जरूरी सामान निकालने की कोशिश कर रहा था। चारों तरफ चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
ग्रामीणों ने तुरंत प्रशासन और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया। एसडीएम मधुसूदन गुप्ता, सीओ यादवेंद्र यादव और तहसीलदार दिनेश कुमार पूरी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। वहीं जिला अग्निशमन अधिकारी अक्षय रंजन शर्मा तीन फायर टेंडर के साथ गांव पहुंचे।
लेकिन आग और तेज हवाओं के सामने राहत टीम की चुनौती आसान नहीं थी। आग लगातार एक घर से दूसरे घर तक फैलती जा रही थी। फायर ब्रिगेड और स्थानीय लोगों ने घंटों मशक्कत की, तब कहीं जाकर आग पर काबू पाया जा सका। पूरी रात गांव में राहत और बचाव अभियान चलता रहा।
इस दौरान प्रशासन ने सबसे पहले प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम किया। गांव के पंचायत भवन को अस्थायी राहत केंद्र बनाया गया, जहां प्रभावित लोगों के लिए भोजन और जरूरी व्यवस्थाएं की गईं। तहसील प्रशासन और ग्राम प्रधान की देखरेख में भोजन पैकेट तैयार कराए गए और पीड़ित परिवारों में वितरित किए गए।
मंगलवार सुबह हादसे की गंभीरता को देखते हुए डीएम अंजनी कुमार सिंह और एसपी डॉ. ख्याति गर्ग खुद गांव पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने जले हुए घरों का निरीक्षण किया और पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनका हाल जाना। कई परिवार ऐसे थे जिनके पास अब सिर्फ बदन पर पहने कपड़े ही बचे थे। बच्चों की आंखों में डर साफ दिखाई दे रहा था, जबकि बुजुर्ग अपने उजड़े आशियाने को देखकर भावुक हो उठे।
डीएम अंजनी कुमार सिंह ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत उपलब्ध कराई जाए और नुकसान का जल्द से जल्द आंकलन किया जाए। उन्होंने राजस्व विभाग की टीम को शासकीय सहायता देने की प्रक्रिया तेजी से पूरी करने को कहा।
वहीं एसपी डॉ. ख्याति गर्ग ने सुरक्षा व्यवस्था और राहत कार्यों को लेकर मातहतों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं होनी चाहिए और प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ राहत कार्य कराए।
प्रशासन की सक्रियता से गांव में राहत कार्य लगातार जारी रहे। प्रभावित लोगों को भोजन, पानी और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जाती रही। अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए थे।
इस दर्दनाक हादसे के बाद डीएम अंजनी कुमार सिंह ने आमजन से भी अपील की कि भीषण गर्मी और आंधी के मौसम में विशेष सावधानी बरती जाए। उन्होंने कहा कि छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। खासतौर पर आग और बिजली से जुड़े मामलों में सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
मितौली के इस हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि गर्मी और आंधी के मौसम में जरा सी चूक कितनी बड़ी तबाही में बदल सकती है। फिलहाल गांव में राहत कार्य जारी हैं और प्रशासन प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता पहुंचाने में जुटा हुआ है।

 

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