मां कंधों पर, पिता तस्वीर में… 60 KM की कांवड़ यात्रा ने याद दिलाया श्रवण कुमार!
एक पलड़े में वृद्ध मां, दूसरे में दिवंगत पिता की तस्वीर; शिवभक्ति के साथ माता-पिता के सम्मान की अनोखी मिसाल

जिस कांवड़ को देखकर रास्ते में लोग ठहर गए… उसमें आखिर ऐसा क्या था? एक तरफ मां बैठी थीं और दूसरी तरफ पिता की तस्वीर। करीब 60 किलोमीटर की इस यात्रा की कहानी आपको भावुक कर देगी।
लखीमपुर खीरी। सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति का महीना माना जाता है। लाखों श्रद्धालु कांवड़ लेकर शिवालयों की ओर निकलते हैं, लेकिन लखीमपुर खीरी में एक शिवभक्त की कांवड़ यात्रा ने भक्ति के साथ-साथ माता-पिता के प्रति सम्मान की ऐसी तस्वीर पेश की है, जिसे देखकर लोग भावुक हो रहे हैं।
बिजुआ विकासखंड के मूड़ा खुर्द ग्राम पंचायत के मजरा अलियाबाद निवासी दिनेश यादव पलिया की शारदा नदी से पवित्र जल भरकर गोला गोकर्णनाथ की छोटी काशी के लिए करीब 60 किलोमीटर की पैदल कांवड़ यात्रा पर निकले हैं। उनकी कांवड़ सामान्य कांवड़ से बिल्कुल अलग है।
एक पलड़े में मां, दूसरे में पिता की तस्वीर
दिनेश यादव ने कांवड़ के एक पलड़े में अपनी वृद्ध मां जगपति देवी को बैठाया है, जबकि दूसरे पलड़े में उनके दिवंगत पिता नत्थू लाल की तस्वीर ससम्मान रखी है। कंधों पर मां और दिल में पिता की याद लिए दिनेश जब रास्ते से गुजरते हैं तो लोग कुछ पल के लिए ठहर जाते हैं।
कई लोग इस दृश्य को अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर रहे हैं तो कई लोग दिनेश को कलयुग का श्रवण कुमार कहकर उनका उत्साह बढ़ा रहे हैं।
अधूरी इच्छा को बेटे ने बनाया संकल्प
दिनेश के मुताबिक उनकी मां अब उम्र के उस पड़ाव पर हैं, जहां उनके लिए लंबी दूरी पैदल तय करना मुश्किल है। दूसरी ओर उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। दिनेश के मन में लंबे समय से इच्छा थी कि वह माता-पिता दोनों को साथ लेकर बाबा गोकर्णनाथ के दरबार में जल अर्पित करें।
पिता की अनुपस्थिति ने उनकी इस इच्छा को अधूरा नहीं रहने दिया। उन्होंने पिता की तस्वीर को कांवड़ में स्थान दिया और मां को कांवड़ में बैठाकर यात्रा शुरू कर दी।
परिवार भी बना यात्रा का हिस्सा
इस भावुक यात्रा में दिनेश अकेले नहीं हैं। उनकी पत्नी अंशिका देवी और पुत्र अंकुल यादव भी उनके साथ पैदल चल रहे हैं। पूरा परिवार ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के बीच आगे बढ़ रहा है।
रास्ते में जहां भी यह अनोखी कांवड़ पहुंचती है, लोग परिवार का स्वागत करते हैं। श्रद्धालुओं के बीच यह कांवड़ चर्चा का विषय बनी हुई है।
शिवभक्ति के साथ समाज को बड़ा संदेश
दिनेश यादव की यह यात्रा सिर्फ जल लेकर शिवालय तक पहुंचने की धार्मिक यात्रा नहीं है। यह माता-पिता के प्रति प्रेम, सम्मान और जिम्मेदारी का भी संदेश दे रही है।
आज के दौर में जब माता-पिता की उपेक्षा की खबरें अक्सर सामने आती हैं, ऐसे समय में दिनेश की करीब 60 किलोमीटर की पदयात्रा यह याद दिलाती है कि माता-पिता का सम्मान और उनकी सेवा भी किसी पूजा से कम नहीं।
गोला गोकर्णनाथ की छोटी काशी की ओर बढ़ते दिनेश के कंधों पर सिर्फ कांवड़ का भार नहीं है—एक तरफ मां का आशीर्वाद है, तो दूसरी तरफ पिता की स्मृतियां। यही वजह है कि उनकी यह यात्रा सावन की भीड़ में एक ऐसी कहानी बन गई है, जिसे देखकर लोग श्रवण कुमार की भक्ति को याद कर रहे हैं।



