बोतल पर Whisky-Rum… अंदर क्या? Old Monk से Royal Challenge तक FSSAI के एक्शन ने क्यों मचाई हलचल
Old Monk, Royal Challenge, Antiquity Blue, Bagpiper और McDowell’s No.1 जैसे चर्चित नामों से जुड़े कुछ उत्पाद कार्रवाई की चर्चा में; फ्लेवरिंग, एजिंग और लेबलिंग पर सवाल—लेकिन क्या सच में पूरे देश में बैन हो गए ये ब्रांड?

जाम छलकते रहे, नाम बिकते रहे और बोतलों पर लिखे दावों पर ग्राहक भरोसा करते रहे। लेकिन अब सवाल बोतल की कीमत या ब्रांड का नहीं, उसके अंदर मौजूद उत्पाद और बाहर लिखे दावे का है। FSSAI की कार्रवाई के बाद बड़े शराब ब्रांड्स के नाम चर्चा में आए तो सोशल मीडिया पर ‘बैन’ की खबरें दौड़ने लगीं। मगर पूरी कहानी इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है
नई दिल्ली। भारतीय शराब बाजार के कुछ चर्चित ब्रांड्स से जुड़े उत्पाद खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI की कार्रवाई को लेकर सुर्खियों में हैं। Old Monk से लेकर Royal Challenge, Antiquity Blue, Bagpiper और McDowell’s No.1 तक के नाम सामने आने के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आया है।
लेकिन सबसे पहले एक बात स्पष्ट करना जरूरी है—इसे इन सभी ब्रांड्स पर पूरे भारत में लगा पूर्ण प्रतिबंध समझना सही नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक कार्रवाई कुछ उत्पादों और संबंधित मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में सामने आए कथित उल्लंघनों से जुड़ी है।
आखिर बोतल में ऐसा क्या था, जिस पर उठे सवाल?
इस पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी फ्लेवरिंग बताई जा रही है।
व्हिस्की और रम जैसे उत्पादों के लिए उनकी प्रकृति, निर्माण प्रक्रिया और लेबलिंग से जुड़े मानक निर्धारित हैं। रिपोर्टों के मुताबिक जांच में कुछ उत्पादों में फ्लेवरिंग पदार्थों के इस्तेमाल को लेकर सवाल सामने आए।
अब सवाल यह है कि अगर किसी स्पिरिट को फ्लेवरिंग के जरिए व्हिस्की या रम जैसा स्वाद और सुगंध दी गई है, तो क्या उसे ग्राहक के सामने केवल Whisky या Rum के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है?
नियामकीय नजरिए से उत्पाद की वास्तविक प्रकृति और लेबल पर दी गई जानकारी का मेल खाना महत्वपूर्ण है।
सिर्फ फ्लेवर नहीं, बोतल पर लिखे दावे भी घेरे में
मामला यहीं खत्म नहीं होता।
रिपोर्टों के अनुसार कुछ मामलों में एजिंग, यानी शराब को कितने समय तक परिपक्व किया गया, उससे संबंधित दावों पर भी सवाल उठे हैं।
यदि बोतल पर लिखी जानकारी ग्राहक को उत्पाद की उम्र, प्रकृति या गुणवत्ता के बारे में ऐसी धारणा देती है जो उसकी वास्तविक निर्माण प्रक्रिया से मेल नहीं खाती, तो लेबलिंग पर नियामकीय सवाल उठ सकते हैं।
सीधे शब्दों में कहें तो—बोतल के बाहर जो दावा किया गया है, अंदर का उत्पाद भी उस दावे के अनुरूप होना चाहिए।
Old Monk से Royal Challenge तक किन नामों की चर्चा?
मीडिया रिपोर्टों में Old Monk के कुछ वेरिएंट, Antiquity Blue Whisky, Royal Challenge Whisky, Bagpiper Deluxe Whisky, Old Cask Deluxe XXX Rum और McDowell’s No.1 Rum से जुड़े कुछ उत्पादों का उल्लेख सामने आया है।
इनमें कई नाम दशकों से भारतीय शराब बाजार में मौजूद हैं। यही कारण है कि बड़े ब्रांड्स का नाम सामने आते ही खबर ने तेजी पकड़ ली।
क्या Old Monk और Royal Challenge पूरे भारत में बैन हो गए?
नहीं—उपलब्ध जानकारी के आधार पर ऐसा कहना सही नहीं होगा।
कार्रवाई को सभी सूचीबद्ध ब्रांड्स की प्रत्येक बोतल, प्रत्येक वेरिएंट और पूरे देश में बिक्री पर एक साथ लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
रिपोर्टों के मुताबिक संबंधित मामलों में कुछ उत्पादों को लेकर Prohibition of Sale, यानी बिक्री रोकने की कार्रवाई की बात सामने आई है।
इसलिए सोशल मीडिया पर यदि कोई दावा करता है कि “Old Monk और Royal Challenge समेत ये सभी ब्रांड पूरे भारत में बैन हो गए”, तो ऐसे दावे को संदर्भ के बिना सही मानना उचित नहीं होगा।
क्या बदल सकता है Whisky-Rum का लेबल?
इस कार्रवाई का दूरगामी असर शराब की लेबलिंग पर पड़ सकता है।
यदि कोई उत्पाद निर्धारित मानकों के मुताबिक Whisky या Rum की श्रेणी में नहीं आता और उसका स्वाद फ्लेवरिंग के जरिए तैयार किया गया है, तो उसकी वास्तविक प्रकृति ग्राहक के सामने अधिक स्पष्ट तरीके से बताने की जरूरत पड़ सकती है।
यानी “Whisky Flavoured Spirit” या “Rum Flavoured Spirit” जैसी पहचान का मुद्दा महत्वपूर्ण हो सकता है।
इसका सीधा संबंध उपभोक्ता के जानने के अधिकार से है।
क्या अभी और ब्रांड आएंगे जांच के घेरे में?
यही इस कहानी का अगला बड़ा सवाल है।
रिपोर्टों के मुताबिक अन्य जगहों पर मौजूद डिस्टिलरियों और उनके उत्पादों की जांच तथा नमूने लिए जाने की प्रक्रिया भी इस मामले को आगे बढ़ा सकती है। यदि जांच में दूसरे उत्पादों में भी निर्धारित मानकों का उल्लंघन सामने आता है, तो कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है।
फिलहाल इतना साफ है कि इस मामले ने भारतीय शराब उद्योग में फ्लेवरिंग, एजिंग और लेबलिंग को लेकर नई बहस खड़ी कर दी है।
अब निगाह इस बात पर है कि संबंधित निर्माता नियामकीय आपत्तियों पर क्या जवाब देते हैं और क्या आने वाले समय में उत्पादों की संरचना अथवा लेबलिंग में बदलाव देखने को मिलता है।
Ground Zero Report Digital इस मामले से जुड़े आगे के घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
डिस्क्लेमर: यह समाचार केवल सूचना एवं जन-जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। इसका उद्देश्य शराब या किसी शराब ब्रांड के सेवन अथवा बिक्री को प्रोत्साहित करना नहीं है। शराब का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।



