मेडिकल कॉलेज में नौकरी का ‘खेल’! ₹1.10 लाख लेने का आरोप, फिर लौटे पैसे; वायरल ऑडियो ने खोले नए सवाल—आखिर सच क्या है?
लखीमपुर खीरी राजकीय मेडिकल कॉलेज से जुड़े कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल; छह लोगों ने नौकरी के नाम पर पैसे देने का लगाया था आरोप, बाद में रकम वापस मिलने का दावा और प्राचार्य को क्लीन चिट देता शपथपत्र—CO और SDM की जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

₹1.10 लाख में नौकरी का दावा… फिर पैसा वापस!
शपथपत्र में प्राचार्य की संलिप्तता से इनकार…
लेकिन वायरल ऑडियो में आखिर किस पैसे की हो रही है चर्चा?
लखीमपुर मेडिकल कॉलेज के विवाद की पूरी कहानी पढ़िए…
लखीमपुर खीरी के राजकीय मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्सिंग के जरिए नौकरी दिलाने के नाम पर कथित रूप से पैसे लेने का मामला लगातार उलझता जा रहा है। एक तरफ छह लोगों द्वारा प्रति व्यक्ति करीब 1 लाख 10 हजार रुपये दिए जाने का आरोप है, दूसरी तरफ पैसा वापस मिलने का वीडियो सामने आया है। इसी बीच प्राचार्य वाणी गुप्ता और उनके ड्राइवर बताए जा रहे संदीप यादव से जुड़े होने का दावा करते हुए कई कथित ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
हालांकि Ground Zero Report Digital वायरल ऑडियो की प्रामाणिकता और उसमें सुनाई देने वाली आवाजों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता।
छह लोगों से ₹1.10 लाख लेने का आरोप
मामले में छह लोगों की ओर से आरोप लगाया गया कि मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्सिंग कंपनी के माध्यम से नौकरी लगवाने के नाम पर संदीप यादव ने उनसे अथवा उनके परिजनों से प्रति व्यक्ति करीब 1 लाख 10 हजार रुपये लिए।
आरोपों के बीच मामला तब और चर्चा में आ गया जब एक वीडियो सामने आया, जिसमें कुछ लोग हाथों में रुपये पकड़े दिखाई दे रहे हैं और नौकरी के लिए दिया गया पैसा वापस मिलने की बात कहते नजर आ रहे हैं।
यहीं सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—अगर नौकरी के नाम पर रकम दी गई थी तो उसे वापस करने की नौबत क्यों आई?
SP को शपथपत्र, प्राचार्य की भूमिका से इनकार
मामले में 24 जुलाई 2026 को सुरजीत वर्मा, रामजीवन, सुरेश कुमार वर्मा, सर्वेश वर्मा, जितेंद्र कुमार और रामखेलावन की ओर से पुलिस अधीक्षक के नाम पत्र के साथ शपथपत्र दिए जाने की बात सामने आई।
इन लोगों ने कहा कि नौकरी के लिए दी गई रकम वापस मिल गई है। साथ ही उनका कहना है कि संदीप यादव ने उन्हें कभी मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य वाणी गुप्ता से नहीं मिलवाया था और इस कथित लेन-देन में प्राचार्य की कोई संलिप्तता नहीं थी।
फिर वायरल ऑडियो में किस पैसे की चर्चा?
इसी बीच सोशल मीडिया पर वायरल कथित ऑडियो ने मामले में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। दावा किया जा रहा है कि एक कथित बातचीत में मामले को बैठकर सुलझाने और कितने पैसे लिए गए, इसे लेकर बातचीत जैसी आवाजें सुनाई देती हैं।
लेकिन बड़ा सवाल है कि ये ऑडियो असली हैं या एडिटेड? इन्हें रिकॉर्ड किसने किया और सोशल मीडिया पर वायरल किसने किया?
इनकी फोरेंसिक जांच हुई या नहीं, इसकी आधिकारिक स्थिति सामने आना भी महत्वपूर्ण है।
प्राचार्य वाणी गुप्ता ने क्या कहा?
राजकीय मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य वाणी गुप्ता ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए अपनी संलिप्तता से इनकार किया है। उनका कहना है कि मेडिकल कॉलेज को दो आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से कर्मचारी उपलब्ध कराए जाते हैं। ऐसे में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की नियुक्ति में उनकी कथित मिलीभगत का आरोप निराधार है।
संदीप यादव ने भी एक वीडियो संदेश जारी कर प्राचार्य वाणी गुप्ता की कथित लेन-देन में मिलीभगत होने से इनकार किया है।
पैसा वापस होने से खत्म हो गए सारे सवाल?
यही इस पूरे प्रकरण का सबसे अहम पहलू है। पैसा वापस मिलने का दावा सामने आने के बावजूद यह सवाल बाकी है कि रकम कथित रूप से ली क्यों गई थी और नौकरी दिलाने का भरोसा किस आधार पर दिया गया था?
यदि जांच में किसी आपराधिक कृत्य के साक्ष्य मिलते हैं तो रकम वापस होने का कानूनी प्रभाव क्या होगा, यह जांच एजेंसी और कानून के तहत तय होगा।
मामले की जांच क्षेत्राधिकारी सदर और एसडीएम सदर को सौंपे जाने की बात कही गई थी। अब सबसे बड़ी निगाह उसी जांच के निष्कर्ष पर है।
क्या जांच में कथित आर्थिक लेन-देन की पुष्टि हुई? वायरल ऑडियो की जांच हुई? और पूरे मामले में किसकी क्या भूमिका सामने आई?
इन सवालों का निर्णायक जवाब जांच रिपोर्ट और आधिकारिक साक्ष्यों से ही मिल सकेगा।



