“DM साहब… देखिए नहीं, करवा दीजिए!” 13 साल के मासूम की गुहार सुन भावुक हुआ तहसील दिवस, हर आंख हुई नम
लखीमपुर खीरी के संपूर्ण समाधान दिवस में 13 वर्षीय अमिताभ गुप्ता ने घर पर कब्जे का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह से न्याय की गुहार लगाई। बच्चे की मासूम अपील ने मौजूद अधिकारियों और लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

“जब बड़े-बड़े लोग न्याय के लिए दर-दर भटकते हैं, तब एक 13 साल का मासूम खुद जिलाधिकारी के सामने पहुंचकर कहता है— ‘DM साहब… देखिए नहीं, करवा दीजिए।’ यह सिर्फ एक शिकायत नहीं, बल्कि इंसाफ की उम्मीद से भरी एक मासूम आवाज थी, जिसने पूरे समाधान दिवस को कुछ पल के लिए शांत कर दिया।”
लखीमपुर खीरी। संपूर्ण समाधान दिवस में शनिवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने वहां मौजूद अधिकारियों, कर्मचारियों और फरियादियों को कुछ पल के लिए भावुक कर दिया। बड़े-बड़े विवादों और प्रशासनिक शिकायतों के बीच जब सिर्फ 13 साल का एक बच्चा अपनी फरियाद लेकर जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह के सामने पहुंचा, तो माहौल पूरी तरह बदल गया।
मोहल्ला ईदगाह निवासी 13 वर्षीय अमिताभ गुप्ता ने जिलाधिकारी को बताया कि परिवार के बंटवारे के बाद उसके पिता के हिस्से में जो मकान आया था, उसे लेकर अब विवाद है। बच्चे का आरोप है कि उसकी ताई ने मकान के एक हिस्से पर कब्जा कर ताला लगा दिया है। उसने कहा कि इस मामले में कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक समाधान नहीं हो सका।
अमिताभ ने जिलाधिकारी के सामने अपने परिवार की परिस्थितियों का भी जिक्र किया। उसके अनुसार, उसके पिता की मानसिक स्थिति ठीक नहीं रहती, जबकि उसकी मां मेहनत-मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करती हैं। उसने कहा कि परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा है और न्याय की उम्मीद में कई बार अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़े।
बच्चे ने यह भी आरोप लगाया कि पहले की शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उसने कहा कि शिकायतों पर मुहर लगने के बावजूद उसे राहत नहीं मिली। उसके अनुसार, इस बार वह खुद जिलाधिकारी से मिलने आया ताकि उसकी बात सीधे सुनी जा सके।
जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने बच्चे की पूरी बात गंभीरता से सुनी। उन्होंने मौके पर मौजूद संबंधित पुलिस अधिकारी से मामले की जानकारी ली और शिकायत का परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
इसी दौरान एक ऐसा पल आया जिसने वहां मौजूद सभी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। जब अधिकारियों ने कहा कि “देख लेंगे”, तो अमिताभ तुरंत बोल पड़ा—
“देखिए नहीं… करवा दीजिए।”
यह सुनकर सभागार में मौजूद कई लोग मुस्कुरा उठे, लेकिन बच्चे के चेहरे पर झलक रही बेबसी और इंसाफ की उम्मीद ने पूरे माहौल को भावुक बना दिया।
अमिताभ ने यह भी कहा कि उसकी मां रोज मेहनत-मजदूरी करने जाती हैं और परिवार का गुजारा मुश्किल से चलता है। उसका कहना है कि घर के विवाद के कारण परिवार लंबे समय से परेशान है और अब उसे प्रशासन से न्याय की उम्मीद है।
संपूर्ण समाधान दिवस में आई यह फरियाद केवल एक संपत्ति विवाद की कहानी नहीं थी, बल्कि एक ऐसे बच्चे की आवाज थी जो अपने परिवार के लिए न्याय मांग रहा था। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस शिकायत की जांच के बाद क्या कार्रवाई करता है और क्या अमिताभ को उसकी अपेक्षित राहत मिल पाती है।



