उत्तर प्रदेश

3 साल बाद लौटी दुर्लभ एकादशी! आखिर क्यों पद्मिनी एकादशी को माना जाता है मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने वाला सबसे चमत्कारी व्रत?

3 साल बाद आई दुर्लभ पद्मिनी एकादशी! मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने वाला यह व्रत बदल सकता है आपकी किस्मत… पढ़ें पूरी कथा, महत्व और पूजा विधि 👇

कहते हैं इस एकादशी का व्रत करने वाले पर मां लक्ष्मी स्वयं कृपा बरसाती हैं। अधिकमास में आने वाली पद्मिनी एकादशी को लेकर धार्मिक मान्यता है कि इसका प्रभाव सीधे जीवन के दुख, दरिद्रता और पापों को समाप्त करता है। आखिर क्या है इस व्रत का रहस्य, क्यों 3 साल में केवल एक बार आता है

यह शुभ संयोग और क्या है इसकी पौराणिक कथा — जानिए पूरी जानकारी…
पद्मिनी एकादशी 2026 : दुर्लभ और अत्यंत पुण्यदायी व्रत
अधिकमास में आने वाली पद्मिनी एकादशी को सनातन धर्म में बेहद विशेष माना गया है। इसे कमला एकादशी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह एकादशी लगभग 3 साल में एक बार आती है और इस दिन भगवान विष्णु तथा मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व होता है।
मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और भक्त के जीवन से आर्थिक संकट, मानसिक परेशानियां और नकारात्मकता दूर होती है।
इस वर्ष पद्मिनी एकादशी 27 मई को मनाई जा रही है।
क्यों रखा जाता है पद्मिनी एकादशी का व्रत?
धर्म ग्रंथों के अनुसार यह व्रत व्यक्ति को पापों से मुक्ति दिलाने वाला और सुख-समृद्धि देने वाला माना गया है।
व्रत रखने के पीछे मुख्य कारण
मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए
आर्थिक संकट और दरिद्रता दूर करने के लिए
परिवार में सुख-शांति बनाए रखने के लिए
मोक्ष और पुण्य की प्राप्ति के लिए
नकारात्मक शक्तियों और बुरे सपनों से मुक्ति पाने के लिए
युधिष्ठिर के प्रश्न पर भगवान श्रीकृष्ण ने बताई थी महिमा
पौराणिक कथा के अनुसार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा था कि अधिकमास में आने वाली एकादशी का क्या महत्व है, इसकी पूजा विधि क्या है और इससे कौन-सा फल मिलता है।
तब भगवान श्रीकृष्ण ने बताया कि अधिकमास की यह एकादशी “कमला” नाम से प्रसिद्ध है, जिसे पद्मिनी एकादशी भी कहा जाता है। यह व्रत मनुष्य की सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाला और सभी पापों का नाश करने वाला माना गया है।
पद्मिनी एकादशी की कथा : मां लक्ष्मी कैसे हुईं प्रसन्न?
अवन्तीपुरी में शिवशर्मा नाम के एक ब्राह्मण रहते थे। उनके पांच पुत्र थे, जिनमें सबसे छोटा पुत्र बुरे कर्मों में लिप्त रहता था। उसके गलत आचरण से परेशान होकर परिवार ने उससे संबंध तोड़ दिए।
गांव से निकाले जाने के बाद वह जंगलों में भटकता हुआ तीर्थराज प्रयाग पहुंचा। वहां उसने मुनियों के आश्रम में कमला एकादशी की महिमा सुनी। भूखा और दुखी होने के बावजूद उसने विधिपूर्वक व्रत रखा और भगवान विष्णु का स्मरण किया।
आधी रात को हुआ चमत्कार
कथा के अनुसार मध्यरात्रि में मां लक्ष्मी स्वयं उसके सामने प्रकट हुईं और बोलीं कि कमला एकादशी के प्रभाव से वह उस पर प्रसन्न हैं।
मां लक्ष्मी ने उसे बताया कि—
एकादशी का व्रत करोड़ों पापों का नाश करता है
भगवान विष्णु का नाम जपने वालों पर देवता भी प्रसन्न रहते हैं
इस व्रत से भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है
मां लक्ष्मी के आशीर्वाद से वह निर्धन ब्राह्मण सुखी और समृद्ध हो गया।
पद्मिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
सनातन परंपरा में यह व्रत अत्यंत दुर्लभ और फलदायी माना गया है।
महत्वपूर्ण धार्मिक मान्यताएं
✔ इस दिन व्रत रखने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा मिलती है
✔ भगवान विष्णु के नाम-जप से पुण्य बढ़ता है
✔ दरिद्रता और दुखों का नाश होता है
✔ जीवन में सुख-समृद्धि आती है
✔ मोक्ष प्राप्ति का मार्ग खुलता है
कैसे करें पद्मिनी एकादशी व्रत?
सुबह स्नान कर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें
पीले वस्त्र और तुलसी का प्रयोग शुभ माना जाता है
पूरे दिन सात्विकता और संयम रखें
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें
रात में भजन-कीर्तन और जागरण करें
द्वादशी के दिन व्रत पारण करें
महत्वपूर्ण बातें जिन्हें जरूर मानें
क्या करें
✔ भगवान विष्णु का स्मरण
✔ तुलसी पूजन
✔ दान-पुण्य
✔ कथा श्रवण
क्या न करें
✘ क्रोध
✘ झूठ बोलना
✘ तामसिक भोजन
✘ अपशब्द और विवाद
निष्कर्ष
पद्मिनी एकादशी केवल एक व्रत नहीं बल्कि श्रद्धा, संयम और भक्ति का पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से इस व्रत को करता है और कथा सुनता है, उस पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहती है। यही कारण है कि 3 साल में एक बार आने वाली यह एकादशी भक्तों के लिए बेहद खास मानी जाती है।

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